Friday, September 18, 2026

चाय की दुकान पर बारिश - Hindi Poem

बारिश, चाय, और रुक जाना। मूल कविता, माझा विरांगुला, 18 सितंबर 2026।

चाय की दुकान पर टीन की छत बज रही है जैसे कोई पुराना गाना याद कर रहा हो।
कड़ाह में दूध उबलता है, और उबाल में शहर की जल्दी भी डूब जाती है।

दुकान वाला चश्मा माथे पर चढ़ाए खड़ा है।
उसके हाथ में करछुल है, करछुल में भाप है, भाप में बचपन की गली है।
वह पूछता नहीं कि तुम कहाँ से आए। वह पूछता है, चीनी कम?

मैं बेंच पर बैठता हूँ जैसे कोई फैसला टाल रहा हो।
जूते गीले हैं। सड़क ने अपना नाम बदल लिया है कीचड़ में।
रिक्शा वाला तिरपाल तानकर हँसता है, मानो बारिश उसका रिश्तेदार हो।

गिलास गरम है। अँगुलियाँ सीखती हैं कि दर्द भी पकड़ में आता है।
अदरक की खुशबू में एक घर घूमता है जो अब नक्शे पर नहीं है।
माँ कहती थीं, चाय पीकर फिर निकलना। निकलना हमेशा बाद में होता था।

बाहर पोस्टर भीग रहे हैं। नायक की मुस्कान पानी पी रही है।
कुत्ता दुकान के नीचे सोया है जैसे रात ने उसे पाली हो।
रेडियो एक गीत चलाता है और बीच में खामोश हो जाता है, जैसे खुद शर्मा गया हो।

लोग आते हैं सिर्फ़ छिपने को। कुछ पैसे गिनते हैं जैसे बारिश गिनी जा सकती हो।
कोई अखबार खोलता है, कोई बंद करता है। खबरें गीली हो जाती हैं पहले स्याही से।
मैं सोचता हूँ, रुकना भी एक काम है। भागना सब सीख गए।

जब बारिश थमती है तो दुकान छोटी पड़ जाती है।
आवाज़ें लौटती हैं। हॉर्न लौटता है। जल्दी लौटती है।
मैं आखिरी घूँट में वह रास्ता रख लेता हूँ जो घर तक गीला ही रहेगा।

चाय खत्म। गिलास खाली। छत अभी भी गा रही है।
जो लोग रुक गए थे, वे फिर चल पड़े।
जो लोग चल रहे थे, वे कभी दुकान तक आए ही नहीं।
और मैं—मैं सिर्फ़ इतना जानता हूँ:
गरम गिलास हाथ में हो तो दुनिया थोड़ी देर माफ़ हो जाती है।

माझा विरांगुला

What Is Life - English Poem

An original lyric on ordinary living. Maza Virangula, 18 September 2026. Life is the kettle that learns your name before the morning has a ...