Monday, September 12, 2022

Hindi poem - पैगाम

लगाकर देखो पहरा यादों पे 
चला दो हल किये इरादोपे 
बारिश में भीगी मिट्टी मेहककर सहेगी 
और हवाए हर दिशा खुशबू का पैगाम बहायेंगी
 
 
 

 

Saturday, August 20, 2022

Mazi Priya Ashi Asavi / माझी प्रिया अशी असावी


आवाज देता कोणी तुज़ीच हाक कानी यावी
मी शोधिल जेंव्हा सगळीकडे तूच दिसावी
अशीच सुन्दर मनमोहिनी माझी प्रिया असावी

जिच्या रुसन्याने हृदयावर विज पडावी
जिच्या हसण्याने बागेतील फुलेसुद्धा हसावी
अशीच सुन्दर मनमोहिनी माझी प्रिया असावी

कधी आरशात मी पाहता माझी प्रतिमा नसावी
तिथे स्वप्नातील ती माझी प्रिया असावी
अशीच  सुन्दर मनमोहिनी माझी प्रिया असावी

माझी प्रिया अशी असावी
प्रथमदर्शी तिला पाहता कविता स्मरावी
अशीच सुन्दर मनमोहिनी माझी प्रिया असावी

Tuesday, August 2, 2022

Hindi poem - सच्चे दोस्त

आसु  भी बड़े अजीब हैं 
महफ़िल मैं चले आते हैं 
सच्चे दोस्तों की तरह साथ निभाते हैं 

काश सिख जाते कुछ फरेब 
तो बड़ो की तरह बेवजह मुस्कुराते 
ये सच्चे हैं पर इनका तजुर्बा कच्चा हैं 
दिल अभी भी इनका बच्चा हैं 

हम आज पुराणी तस्वीरों मैं हसी ढूंढते हैं 
मुस्कुराने को कोई वजह ढूंढते हैं 

जमाना बड़ा ही गजब हैं 
आज हाथ मैं तागा  बांधकर 
दोस्त बनता हैं दोस्ती जताता हैं 

आओ  दिलो से जुड़े सच्चे दोस्त ढूंढते हैं 
आओ अब हम सच्चे दोस्त ढूंढते हैं 

स्वतःशी झालेली भेट

  स्वतःशी झालेली भेट सगळ्यांसाठी धावताना, कधी स्वतःसाठी थांबलोच नाही, कुणाचं मन जपता जपता, आपलंच मन कधी जपलं नाही. एक दिवस असाच शांत बसलो, क...